[प्रस्तावना]
बाँधा नैनों ने नैनों से डोरा
मोहे खींचे चला मोह तोरा
तोहे सौंपा है तन मन ये कोरा
मोहे थामे तू रखना सदा
[अंतरा 1]
वारूँ वारूँ मैं वारूँ तोरी
अब ना जग की है परवाह कोई
थाम ले तू मोरी ज़िंदगी
तोह से बढ़के ना कोई खुशी
[मुखड़ा]
वारूँ वारूँ मैं वारूँ तोरी
आज सौंपते हैं सपने सभी
नैना तोरे तिजोरी मोरी है मोरी
[अंतरा 2]
फीका था मनवा ये मोरा
छू के तूने भरा रंग तोरा
तेरे जैसा सजा है ये अपना
तोहरे आने से मिलता मोरा
[मुखड़ा]
वारूँ वारूँ मैं वारूँ तोरी
तो से नाता है मोरा कोई
तू गगन, मैं पवन हूँ तोरी
मोरी साँसें भी सब हैं तोरी
[मुखड़ा]
वारूँ वारूँ मैं वारूँ तोरी
मोहे आँखों में भर ले कहीं
तोरी खुशियों से धड़कन बोले है मोरी
[ब्रिज]
तोह से जन्मों का फेरा है मोरा
भोली छाया में मोरा बसेरा
मैं सब कुछ लुटा दूँ
मो पे रखियो भरोसा ज़रा
[ब्रिज – भाग 2]
तेरे नाज़ सारे उठा लूँ जो कहे
ये नैना मोरे मोरे
जागे हैं संग तोरी
हर रात तोरी सजा दूँ जो कहे
[अंतिम मुखड़ा]
है जीना मोहे मोहे जीना है संग तोरे
तोरे आगे मैं सर को झुका दूँ
थोड़े सपने पलक पे बिठा दूँ
काला टीका मैं तोहे लगा दूँ
तू ही लागे नज़र ना ज़रा
[समापन]
बाँधा नैनों ने नैनों से डोरा
मोहे खींचे चला मोह तोरा
मोहे थामे तू रखना सदा
[लिखित]
जिनी दीवान